Hours and crocodiles on Krishna birth anniversary, women sang Mangal songs in ecstasy | कृष्ण जन्मोत्सव पर बजे घंटे-घड़ियाल, महिलाओं ने उत्साह में गाए मंगल गीत

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भरतपुर31 मिनट पहले

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  • भक्त प्रहलाद, वामन अवतार और भगवान श्रीराम के चरित्र का हुआ मनोहारी वर्णन

रेलवे स्टेशन के निकट थानेश्वर महादेव मंदिर में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन वामन भगवान की कथा का मनोहारी वर्णन किया गया। इस दौरान प्रहलाद चरित्र वर्णन, भगवान श्रीकृष्ण का अवतार और मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम अवतार की कथाएं सुनाई गईं। श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म से माहौल भक्तिमय हो गया।

पंडाल में बैठी अनेक महिलाएं मंच के सामने आकर पूरे उत्साह व उमंग से नाचने लगीं। एक-दूसरे की देखादेखी अन्य महिलाएं भी साथ होकर झूमने लगीं। पूरा पंडाल तालियां से गूंजता रहा। आखिरी में माखन मिश्री का प्रसाद बांटा। सुबह 6 बजे पिंटू भगत ने हनुमान जी महाराज का श्रृंगार कर चोला चढ़ाया। भागवत कथा में पूरन सिंह मीणा परीक्षित बने।

वृंदावन से पधारे आचार्य सचिन कृष्ण शास्त्री ने भक्त प्रहलाद-चरित्र का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। श्रीकृष्ण का जन्म होते ही पांडाल में शंख और गाजे बाजों की आवाजें गूंजने लगी। कथा में मुख्य रूप से मनीष, रवि, मिथुन, रिंकू रामहरी, घनश्याम आदि मौजूद रहे।

श्रीकृष्ण के बाल रूप की आकर्षक झांकी निकाली

ई-ब्लॉक रणजीत नगर स्थित श्री आशुतोष महादेव मंदिर पर चल रही भागवत कथा में मंगलवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का कथाव्यास शशिकांत भारद्वाज ने सजीव वर्णन किया। भागवत कथा में भगवान के जन्मोत्सव को लेकर मंच को फूलों की माला और गुब्बारों से विशेष रूप से सजावट की गई। इस विशेष दिन को लेकर श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रही। कथावाचक शशिकृष्ण भारद्वाज ने भगवान श्री कृष्ण की जन्म कथा सुनाते हुए कहा कि बाल गोपाल का जन्म देवकी और वासुदेव के आठवें संतान के रूप में होता है। भारद्वाज ने कहा कि हर मनुष्य के जीवन में छह शत्रु हैं, काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ व अहंकार।

जब हमारे अंदर के ये छह शत्रु समाप्त हो जाते हैं तो सातवें संतान के रूप में शेष जी जो काल के प्रतीक हैं वो काल फिर मनुष्य के जीवन में आना भी चाहे तो भगवान अपने योग माया से उस काल का रास्ता बदल देते हैं। तब आठवें संतान के रूप में भगवान श्री कृष्ण का अवतार होता है। जिसके जीवन में भगवान श्री कृष्ण की भक्ति आ गई तो ऐसा समझना चाहिए कि जीवन सफल हो गया। कथा के बीच में भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की आकर्षक झांकी भी निकाली गई। श्री कृष्ण जन्मोत्सव के मौके पर पेश किए गए भजनों पर श्रद्धालु झूमते रहे।



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