State budget today, the people of Bikaner need relief in petrol and diesel | राज्य बजट आज , बीकानेर की जनता को पेट्रोल-डीजल में राहत चाहिए

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बीकानेर4 मिनट पहले

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सोशल मीडिया पर ये कार्टून वायरल हो रहा है। - Dainik Bhaskar

सोशल मीडिया पर ये कार्टून वायरल हो रहा है।

  • Fuel : पेट्रोल 99.76/ लीटर यानी 100 रुपए से सिर्फ 24 पैसे पीछे, डीजल हुआ 91.12 रुपए प्रति लीटर
  • कांटे : सीधा असर ये कि महंगाई आउट ऑफ कंट्रोल, आम आदमी का घर खर्च 4000 रुपए तक बढ़ गया

शहर में पेट्राेल की रेट शतक से महज 24 पैसे दूर है यानी यह 99.76 रुपए लीटर पहुंच चुका है। मंगलवार शाम काे पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल में 29 पैसे और डीजल में 26 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, लेकिन रात में पुराने रेट फिर लागू कर दिए। बढ़ाेतरी के बाद बुधवार सुबह छह बजे से पेट्राेल की नई कीमत 100.05 रुपए लीटर लागू हाेनी थी। वहीं डीजल 26 पैसे प्रति लीटर बढ़ाेतरी के साथ 92.18 रुपए हाे गया था, जिसे अब वापस 91.12 रुपए लीटर कर दिया है। राज्य के श्रीगंगानगर में पेट्रोल 101.79 रुपए हो गया है।

ऐसे बिगड़ रहा घर का बजट

काेराेना के बाद अब तक 11 महीने में पेट्राेल के दाम में 22 और डीजल की रेट में 21 रुपए लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण छह सदस्यों के एक परिवार का मासिक बजट करीब 4 हजार रुपए तक बढ़ गया है। एक्सपर्ट के अनुसार महंगाई और बढ़ेगी।
इस महीने 14 बार बढ़ी रेट

कंपनियों ने फरवरी में ही 14 बार पेट्रोल की रेट में इजाफा किया। एक फरवरी को यह 96.42 रुपए प्रति लीटर था।

डिवोल्यूशन थ्योरी

डार्विन की इवाेल्यूशन थ्योरी

डार्विन ने इस थ्योरी में बताया था कि विभिन्न जीव-जन्तुओं के विकसित होने से इंसान कैसा बना। इसके अनुसार यह सिलसिला साढ़े 3 अरब साल पहले शुरू हुआ। बैक्टीरिया से अमीबा बना, अमीबा से छोटे पौधे-पेड़ बने, फिर कीड़े-मकौड़े और जानवर बने। 600 लाख साल पहले मैमल्स बने। इसी तरह पक्षी बने और रेप्टाइल्स बने। 70 मिलियन साल पहले प्राइमेट्स और 40 लाख साल पहले बंदर बने। 8 मिलियन साल पहले एब से गोरिल्ला और 15 लाख से 3 लाख साल पहले होमो इरेक्टस मतलब ह्युमन बीइंग्स बने।

डार्विन की इवाेल्यूशन थ्योरी

डार्विन ने इस थ्योरी में बताया था कि विभिन्न जीव-जन्तुओं के विकसित होने से इंसान कैसा बना। इसके अनुसार यह सिलसिला साढ़े 3 अरब साल पहले शुरू हुआ। बैक्टीरिया से अमीबा बना, अमीबा से छोटे पौधे-पेड़ बने, फिर कीड़े-मकौड़े और जानवर बने। 600 लाख साल पहले मैमल्स बने। इसी तरह पक्षी बने और रेप्टाइल्स बने। 70 मिलियन साल पहले प्राइमेट्स और 40 लाख साल पहले बंदर बने। 8 मिलियन साल पहले एब से गोरिल्ला और 15 लाख से 3 लाख साल पहले होमो इरेक्टस मतलब ह्युमन बीइंग्स बने।

भास्कर नॉलेज

परेशानी ये कि टैक्स के रूप में केंद्र वसूलता है 32.98 रुपए, राज्य लगाता है करीब 25 रुपए वैट

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी के 2 प्रमुख कारण हैं। पहली वजह यह है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर भारत में काफी अधिक टैक्स लगता है। कोरोना के दौर में केंद्र ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 19.98 से बढ़ाकर 32.98 रुपए कर दिया। इसी तरह डीजल पर ये ड्यूटी 15.83 से बढ़ाकर 31.83 रुपए कर दी। इसके अलावा राजस्थान सरकार इस पर करीब 25 रुपए वैट के वसूलती है। दूसरी वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है।
समाधान ये कि जीएसटी में 28% का टॉप स्लैब लगा दें तो भी काफी कम हो जाएगी कीमत

पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाएं। पेट्रोल पर जीएसटी का टॉप स्लैब यानी 28% लगाया जाए तो भी कीमतें काफी कम हो जाएंगी। दिल्ली में अभी पेट्रोल की बेस प्राइज 32.10 रुपए है। 28% टैक्स लगे तो पेट्रोल महज 41.08 रुपए प्रति लीटर मिलेगा।

आज वैट घटाकर राहत दे सकती है सरकार

राजस्थान में सरकार अभी पेट्रोल पर लगभग 25 रुपए वैट के रूप में वसूल रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों वैट में दो फीसदी की कटौती की थी। बुधवार को राज्य बजट में वे एक बार फिर वैट कम करते हुए जनता को राहत दे सकते हैं।

बीकानेर को ये उम्मीदें हैं बजट से

स्वास्थ्य : कई गांवों में नहीं हैं अच्छी सुविधाएं, पीएचसी की घोषणा से मिलेगी राहत
जिले के ऐसे कई बड़े गांव हैं, जहां सब सेंटर ही हैं। जैसे सत्तासर, कीतासर आदि गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की जरूरत है। कुछ छोटे गांवों में सब सेंटर की मांग की जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में सब सेंटर और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मंजूर किए जाएंगे। हालांकि विधायकों ने भी अपने क्षेत्र के लिए प्रस्ताव सरकार को भेज रखे हैं।
नहर : मरम्मत का बजट बढ़े, जिससे टेल क्षेत्र तक किसानों को मिले सिंचाई का पूरा पानी
बीकानेर जिले में नहरों की स्थिति काफी खराब है। 60 के दशक की ये नहरें अब जर्जर हालत में है। रीलाइनिंग नहीं होने के कारण पानी का रिसाव होता है। इससे टेल इलाके के किसानों को सिंचाई के लिए पूरा पानी नहीं मिलता। खाजूवाला और लूणकरणसर के किसानों को उम्मीद है कि बजट में नहर की मरम्मत के लिए पैसा मिल सकता है।
कृषि : बिजली कनेक्शन को लेकर राहत की आस है किसानों को, घोषणा की उम्मीद
किसान बिजली के कृषि कनेक्शनों के मामले में सरकार से रियायत की उम्मीद कर रहे हैं। वर्तमान में 2012 तक के आवेदनों पर ही कृषि कनेक्शन दिए जा रहे हैं, जबकि सैकड़ों आवेदन लंबित पड़े हैं। दस हजार से अधिक के बिजली के बिल भी माफ करने की मांग किसान कर रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर : शहर की सड़कों की हालत सुधरे, बड़ी घोषणा कर सकती है सरकार
बजट में शहर के तीन एंट्री पॉइंट की सड़कों को फोर लेन बनाने की दिशा में सरकार कोई बड़ा फैसला कर सकती है। जयपुर रोड, जैसलमेर रोड और पूगल रोड को फोर लेन बनाने के लिए जिला प्रशासन स्तर पर पिछले दिनों काफी कसरत की गई थी।

ये सड़कें हालांकि यूआईटी की हैं, लेकिन इसके प्रस्ताव सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से सरकार को भेजे गए हैं। इसी प्रकार कोलायत की सड़कों के लिए भी करीब 40 करोड़ के प्रस्ताव हैं। प्रदेश की सड़कों के लिए मिलने वाले बजट में इन सड़कों का भी उद्धार हो जाएगा।
न्याय क्षेत्र में : कॉमर्शियल कोर्ट खुले, ताकि सुनवाई के लिए जोधपुर नहीं जाना पड़े
बीकानेर में कॉमर्शियल कोर्ट खुलने की उम्मीद है। राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने अपने प्रशासनिक क्षेत्र में इसके लिए अनुशंसा की है। पांच लाख से अधिक के कॉमर्शियल विवादों की सुनवाई के लिए अभी जोधपुर जाना पड़ता है। बीकानेर संभाग मुख्यालय पर कॉमर्शियल कोर्ट खुलने से बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के ऐसे विवादों की सुनवाई यहीं पर हो सकेगी। इसके अलावा खाजूवाला में भी एडीजे कोर्ट की मांग की गई है।

3 पिछली बजट घोषणाएं जो पूरी नहीं हो सकी

1. कांग्रेस सरकार ने पिछले बजट में हर पंचायत समिति स्तर पर एक नन्दी शाला खोलने की घोषणा की थी। इससे पहले वसुंधरा सरकार ने बीकानेर ने नन्दी शाला खोलने की घोषणा की थी। लेकिन एक भी पूरी नहीं हो सकी। शहर में करीब 25 हजार बेसहारा पशु हैं। उनकी चपेट में आने से आए दिन लोग जख्मी होते हैं। 2. आईजीएनपी सेकंड फेज में नाबार्ड से 179 करोड़ के 480 किमी लम्बाई के काम बीकानेर, खाजूवाला, कोलायत से जैसलमेर तक होने थे। लेकिन अब तक शुरू नहीं हुए। 3. राज्य अभिलेखागार में राजस्थानी भाषा के दस्तावेजों का हिंदी में अनुवाद करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाने और राजस्थानी सिखाने का एप बनाने की घोषणा की थी। यह भी पूरी नहीं हो सकी।



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